कभी-कभी ज़िंदगी में एक ऐसा मोड़ आता है जहाँ इंसान के पास सिर्फ दो रास्ते बचते हैं। या तो हार मान लो या फिर पूरी दुनिया को गलत साबित कर दो। एलन मस्क की ज़िंदगी में भी एक ऐसा ही वक्त आया था। साल था 2008। उनकी दो सबसे बड़ी कंपनियाँ टेस्ला और स्पेसएक्स दोनों डूबने की कगार पर थीं। बैंक अकाउंट लगभग खाली हो चुका था। मीडिया रोज़ उनका मज़ाक उड़ा रही थी। हर कोई कह रहा था बस अब एलन मस्क खत्म हो गया। लेकिन सबसे हैरानी की बात ये थी एलन को अपने पैसे खत्म होने का डर नहीं था। उन्हें डर था कहीं उनका सपना अधूरा न रह जाए। और शायद यही वजह थी कि जब पूरी दुनिया उन्हें पागल कह रही थी तब भी उन्होंने हार मानने के बारे में सोचा तक नहीं। लेकिन इस कहानी को समझने के लिए हमें थोड़ा पीछे चलना होगा। 28 जून 1971 साउथ अफ्रीका का एक आम दिन। किसी को अंदाज़ा भी नहीं था कि इसी दिन पैदा हुआ एक छोटा-सा बच्चा एक दिन पूरी दुनिया की सोच बदल देगा। उस बच्चे का नाम था एलन मस्क। बचपन से ही एलन बाकी बच्चों जैसे नहीं थे। जब दूसरे बच्चे बाहर खेलते थे एलन किताबों में खोए रहते थे। उन्हें साइंस स्पेस और टेक्नोलॉजी की दुनिया सबसे ज़्यादा पसंद थी। लेकिन हर अलग सोच रखने वाले इंसान की तरह उन्हें भी इसकी कीमत चुकानी पड़ी। स्कूल में उनका मज़ाक उड़ाया जाता था। कई बार उन्हें धक्का दिया गया और एक बार तो इतनी बुरी तरह मारा गया कि उन्हें अस्पताल तक जाना पड़ा। सोचिए जिस बच्चे को लोग कमजोर समझ रहे थे उसके दिमाग में उस वक्त ऐसे सपने पल रहे थे जो एक दिन पूरी दुनिया को बदलने वाले थे। समय बीतता गया और एलन बड़े होते गए। लेकिन एक चीज़ कभी नहीं बदली उनकी जिज्ञासा। सिर्फ 12 साल की उम्र में उन्होंने खुद से प्रोग्रामिंग सीख ली। और उसी उम्र में अपना पहला वीडियो गेम बना दिया। उस गेम का नाम था ब्लास्टर। जब वो गेम बिका तो पैसे ज़्यादा नहीं मिले। लेकिन उस दिन उन्हें एक बहुत बड़ी चीज़ मिली खुद पर भरोसा। उन्हें यकीन हो गया कि अगर एक छोटा लड़का अपने कमरे में बैठकर कुछ बना सकता है तो एक दिन वो दुनिया के लिए भी कुछ बड़ा कर सकता है। लेकिन सपना देखना आसान होता है उसे सच करना नहीं। एलन ने फैसला किया कि अगर सच में कुछ बड़ा करना है तो अपने कम्फर्ट ज़ोन से बाहर निकलना पड़ेगा। वो साउथ अफ्रीका छोड़कर पहले कनाडा गए फिर अमेरिका। नई जगह नए लोग और जेब में बहुत कम पैसे। कई रातें ऐसे गुज़रीं जब उनके पास आराम से रहने की भी सुविधा नहीं थी। लेकिन एक चीज़ हमेशा उनके साथ रही उनका सपना। और शायद इसी वजह से कहा जाता है सपने वही पूरे करते हैं जो मुश्किलों से भागते नहीं उनका सामना करते हैं। कुछ सालों बाद एलन ने अपनी पहली कंपनी बनाई। फिर दूसरी। धीरे-धीरे उनके पास इतना पैसा आ गया कि वो आराम की ज़िंदगी जी सकते थे। लेकिन उन्होंने आराम नहीं चुना। उन्होंने अपना ज़्यादातर पैसा दो नए सपनों पर लगा दिया। पहला इलेक्ट्रिक कारों का भविष्य। दूसरा इंसानों को एक दिन मंगल ग्रह तक पहुँचाना। दुनिया को ये सपना पागलपन लगता था। लेकिन एलन के लिए यही उनकी ज़िंदगी का सबसे बड़ा मिशन था। और शायद यहीं से उनकी ज़िंदगी का सबसे बड़ा तूफान शुरू हुआ। क्योंकि कुछ ही महीनों बाद ऐसा हुआ जिसने एलन मस्क से लगभग सब कुछ छीन लिया। एलन मस्क अब उस मुकाम पर पहुँच चुके थे जहाँ ज़्यादातर लोग रुक जाते हैं। उनके पास पैसा था नाम था और अगर वो चाहते तो पूरी ज़िंदगी आराम से गुज़ार सकते थे। लेकिन एलन बाकी लोगों जैसे नहीं थे। उन्हें सिर्फ अमीर नहीं बनना था वो दुनिया बदलना चाहते थे। उन्होंने अपना ज़्यादातर पैसा दो कंपनियों में लगा दिया टेस्ला और स्पेसएक्स। उस समय बहुत कम लोग इन दोनों पर भरोसा करते थे। लेकिन एलन को यकीन था कि एक दिन यही कंपनियाँ भविष्य बदलेंगी। शुरुआत में सब ठीक लग रहा था लेकिन फिर किस्मत ने ऐसा खेल खेला जिसने उनकी पूरी ज़िंदगी हिला दी। स्पेसएक्स का पहला रॉकेट लॉन्च हुआ और कुछ ही देर बाद फेल हो गया। एलन ने सोचा पहली बार है गलती हो गई अगली बार सब ठीक होगा। लेकिन दूसरा लॉन्च भी सफल नहीं हुआ। अब लोगों का भरोसा डगमगाने लगा था। मीडिया ने लिखना शुरू कर दिया कि एलन मस्क सिर्फ बड़े-बड़े सपने देखते हैं लेकिन उन्हें पूरा करना नहीं जानते। फिर तीसरा लॉन्च हुआ और वो भी फेल हो गया। उस पल ऐसा लगा जैसे सालों की मेहनत कुछ ही सेकंड में खत्म हो गई हो। स्पेसएक्स के इंजीनियर टूट चुके थे। निवेशक पीछे हटने लगे थे। और टेस्ला भी भारी नुकसान में चल रही थी। एलन के पास पैसे बहुत कम बचे थे। अगर एक और कोशिश नाकाम होती तो शायद सब कुछ खत्म हो जाता। सोचिए आपकी पूरी ज़िंदगी की मेहनत सिर्फ एक आख़िरी मौके पर टिकी हो तो उस रात नींद कैसे आएगी। लेकिन एलन ने डर को अपने फैसले पर हावी नहीं होने दिया। उन्होंने कहा एक आख़िरी कोशिश करेंगे। फिर वो दिन आया जब स्पेसएक्स का अगला रॉकेट लॉन्च होना था। कंट्रोल रूम में सन्नाटा था। किसी के चेहरे पर मुस्कान नहीं थी। हर किसी की धड़कन तेज़ थी। काउंटडाउन शुरू हुआ पाँच चार तीन दो एक। रॉकेट आसमान की तरफ़ बढ़ा। कुछ सेकंड फिर कुछ मिनट और फिर वो खबर आई जिसका इंतज़ार हर कोई कर रहा था। मिशन सफल रहा। उस एक पल ने सब कुछ बदल दिया। धीरे-धीरे स्पेसएक्स को नए मौके मिलने लगे। टेस्ला भी संभलने लगी। जिन लोगों ने कभी एलन का मज़ाक उड़ाया था वही लोग अब उनकी तारीफ करने लगे। लेकिन अगर आप इस पूरी कहानी से सिर्फ एक बात याद रखें तो वो ये है सफल लोग इसलिए सफल नहीं बनते क्योंकि उनकी ज़िंदगी आसान होती है। वो इसलिए सफल बनते हैं क्योंकि सबसे मुश्किल वक्त में भी वो हार नहीं मानते। अगर एलन मस्क तीसरे रॉकेट के बाद रुक जाते तो शायद आज दुनिया उन्हें इस नाम से कभी नहीं जानती। इसलिए अगर आज आपकी ज़िंदगी में भी मुश्किलें हैं तो उन्हें अपनी कहानी का अंत मत समझिए। हो सकता है यही आपकी सबसे बड़ी शुरुआत हो। याद रखिए कभी-कभी ज़िंदगी बदलने के लिए सिर्फ एक आख़िरी कोशिश ही काफी होती है। और शायद आपकी वो आख़िरी कोशिश अभी बाकी है।